इंसान है.. पिंजरे में न रखो

खुदको कमजोर समझके छुपने वाली  
एक शब्द से ज़्यादा न बोल सकने वाली..
..बोलती भी तो आवाज़ दबी हुई, की कोई सुन सके तो बस खुद ही।
चलते हुए सर झुकाए रखना..
जैसे, वे कोई कीट और भगवान है सामने वाला।

खाना बनाते हुए,
चोट लगे तो अंचल से छुपा लेती,
चोट लगे तो अंचल से छुपा लेती
और खाना अच्छी बने.. तो खुद के हिस्से का बांट देने वाली।
सबको बिना एक अल्फ़ाज़ बोले भी खुश रखने वाली।

"रातको बाल खुला नहीं छोड़ते,"
"लड़को से ज़्यादा बात नहीं करते!!"
"अरे तू भी क्या काम करेगी?
पापा है? भाई है ना? या पति? वो कमा लेंगे, तू घर संभाल ले खाली!"
"बड़ी होगाई है.. अब साड़ी पहन, फ्रॉक नहीं!"
"हाय राम!!लड़की क्या हॉकी खेलेगी? वो भी छोटे छोटे कपड़ों में? हमारे यहां यह मानते नहीं!"

सारे नियम मानते हुए-
"हमें यही तो करना होता है.."
यह मानकर आंसू न दिखाके इसमें खुशियां ढूंडके तब थी वह रहती।।

🍁
पर आज, वे कंधे मिलाके साथ चलती
जितना बोलना ज़रूरी है पूरा उतना ही बोलने का अधिकार और दम रखती..
के, "सच बोलरही हूं, तो सुने विश्व के सभी"!

वह है चलते हुए, इज्जत देते और पाते हुए आंखों में आंखें डालकर बोल सकने वाली..
क्युकी सामने वाला भी इसकी तरह है लाल लहू के ही अधिकारी।

खाना बनाते हुए
मम्मी बनके आज भी वो दर्द छुपा लेती,
मगर
दर्द छुपा लेती वो डांट के डर से नहीं!
छुपा लेती अपनों को दर्द में न देखने के लिए ही!
क्युकी वो खुदको संभाल खुद ही लेती!
आज भी खाना अच्छा बने तो बोलती -
"यह खाना मुझे पसंद नहीं.."
झूठ बोलती थी..
झूठ बोलती है.. क्युकी पसंद तो उन्हें भी है.. पर उन्हें खाने से ज़्यादा तुम्हारे खाने कि फिक्र है।

आज यह बाल दिनमे भी बांधती है..अगर उसका मन हो तो।
आज वो बाल रात को भी खुला छोड़ती है.. अगर उसे इच्छा हो तो!
आज मम्मी पापा भी घर बुलाते है उसके सारे दोस्तों को.. लड़की लड़का सबको!
"अरे तूने इंटरव्यू तो दिया न नौकरी का?" लोग भाई के साथ पूछते भी है उसको!
वो आज पापा को दवाई खिलाती तो है, साथ साथ खरीद के भी लाके देती है।
वो आज अपने मन से साड़ी पहनती है..
पहनती है फ्रॉक..
पहनती है शर्ट और शॉर्ट भी!
पर, आज भी गुरुजन से मिले तो.. पैर छूकर प्रणाम भी वही करती है!
क्युकी उसकी पोषक उसकी पसंद है..
उसकी अंदर रहने वाली संस्कार या काम का प्रतीक नहीं!
"अरे वाह! क्या dragflick करती है! तारीफ करते है लोग उसी छोटे कपड़ों में तिरंगे के लिए हॉकी खेलने वाली को भी!"

आज वो उड़ने सीखी है.. उसे न बांधो..
आज वो बोलने सीखी है.. उसे बोलने दो..
आज वो जीना सीख रही है सीखने दो!
वो भी तो इंसान है.. उसे पिंजरे में न रखो!
(Image source: google)

21 Comments

  1. Amita says:

    Good one dear👏👏

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Thanks a lott❤️🤗

      Like

  2. Jeff Flesch says:

    What a beautiful piece, Ahiri. Full of inspiration, love, hope, and the resiliency of the human spirit. Fly, indeed. ❤️🤗

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Thank you so muchh sir! It really means a lot to me! I’m so glad you found the things in the piece that I wanted to put in it!
      This comment means a lot to me! ❤️🙏
      Thank you.

      Liked by 1 person

      1. Jeff Flesch says:

        You’re welcome, Ahiri! It’s always my pleasure to read your work. ❤️🙏

        Liked by 1 person

      2. ahiricreates says:

        Humbled ❤️🙏

        Liked by 1 person

  3. AB says:

    Such a beautiful piece, Ahiri! Really powerful and inspirational! I loved the way you wrote this, it spoke about so many things that we see around us on a daily basis. Very well done! More power to you ❤

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Thanks a lotttt AB❤️! I’m so so glad you found it powerful and inspirational.. makes me happy that I was able to convey the feelings that I wanted to convey through this piece!

      Thank you so much for the kind and encouraging words❤️
      Have a blessed time ahead

      Liked by 1 person

      1. AB says:

        You’re so welcome, Ahiri! You have a lovely day too ❤

        Liked by 1 person

  4. ahiricreates says:

    https://anchor.fm/ahiri-lodh/episodes/INSAAN-HAI—PINJRE-MEI-NA-RAKHO-e17mchp

    HERE’S THE COMPLETE PODCAST/AUDIO VERSION OF THIS WRITTEN PIECE! Please do check it out and leave your kind valuable feedbacks ❤️

    Liked by 1 person

  5. Olivia Ava says:

    Wonderful writing❤️😊

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Thanks a lot ❤️

      Like

  6. Ashish kumar says:

    Waw… this is profound and incredible piece of writing… you have raised a serious issue and at the same time have substantiated the same for those with “orthodox mindset”… A well inspirational poem…

    Bahut hi sundar…

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Means a lot coming from you sir! 🙏
      Thanks a lot!! Humbled ❤️🙏

      Like

  7. Olivia Ava says:

    Lovely writing❤️

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      Thank you so much ❤️

      Like

  8. KK says:

    वास्तविक और मार्मिक चित्रण 👌

    Like

    1. ahiricreates says:

      This means a lot sir coming from you! 🙌
      Thank you so much for giving bits of your valuable time to my page❤️

      Liked by 1 person

      1. KK says:

        It was my pleasure.😊💖

        Liked by 1 person

  9. Loved this beautifully written work!!
    It’s a strong message that all the women wants men to listen
    I wish I had discovered your blogs earlier, cause it would be really amazing to work with you for my upcoming blog on 8th march (International women’s day).

    Liked by 1 person

    1. ahiricreates says:

      This means a lot♥️
      I’m so so glad you found it a strong piece!!
      All these words really means a lot ✨

      Liked by 1 person

Leave a Comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s